बिना किसी सर्जिकल प्रक्रिया से हो रहा उपचार, आयुर्वेद, योगा व ऐलोपैथिक पद्धति बन रही सहायक :सीएमओ

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वाराणसी:गंभीर फाइलेरिया (हाथीपाँव) रोगियों के आयुर्वेदिक थेरेपी, ऐलोपैथ व योगा पद्धति से हो रहा उपचार उनके लिए वरदान साबित हो रहा है। खास बात यह है कि बिना किसी सर्जिकल प्रक्रिया से इसका उपचार संभव हो पा रहा है। 


फाइलेरिया मुक्त भारत की दिशा में चौकाघाट स्थित राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड डर्मेटोलॉजी (आईएडी) फाइलेरिया एकीकृत उपचार केंद्र अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यहाँ मौजूद आयुर्वेद और योगा पद्धति, हाथीपांव ग्रसित गंभीर रोगियों के सम्पूर्ण उपचार में मददगार साबित हो रही है और उन्हें सामान्य जीवन की ओर भी ले जा रही है।

 यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी का।वह बृहस्पतिवार को उपचार केंद्र में भ्रमण करने पहुँचें और उन्होंने यहाँ की समस्त सुविधाओं, स्टाफ समेत फाइलेरिया रोगियों से भी बातचीत की। उनके साथ एसीएमओ डॉ एसएस कनौजिया और बायोलोजिस्ट डॉ अमित कुमार सिंह भी मौजूद रहे। सीएमओ ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार व आयुष मंत्रालय की पहल पर फाइलेरिया एकीकृत उपचार केंद्र का संचालन आईएडी, केरल द्वारा एवं बिल एंड मिलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन (बीएमजीएफ़) के वित्तीय सहयोग से किया जा रहा है। केंद्र की शुरुआत इसी साल 15 मार्च से हुई थी। तब से लेकर अब तक यहाँ 120 गंभीर फाइलेरिया रोगियों को भर्ती किया जा चुका है। 

इसमें से 113 रोगियों का उपचार पूरा हो चुका है जबकि सात रोगियों का उपचार चल रहा है। केंद्र पर रोगियों के उपचार के लिए चिकित्सक सहित आठ स्वास्थ्यकर्मियों का स्टाफ तैनात है। इसमें एक आयुर्वेद चिकित्सक, दो एलोपैथी नर्स, एक योगा थेरेपिस्ट, चार मल्टीपर्पस पैरामेडिकल स्टाफ और एक तकनीकी समन्वयक शामिल हैं। वर्तमान में केंद्र पर महिला व पुरुष के लिए 13 बेड का वार्ड तैयार हैं। सीएमओ ने सभी ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य केन्द्रों के अधीक्षक व प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि गंभीर (ग्रेड थ्री से ऊपर) फाइलेरिया रोगियों को आईएडी फाइलेरिया एकीकृत उपचार केंद्र पर संदर्भित करना जल्द सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि आईएडी के निदेशक डॉ एसआर नरहरी के निर्देशन में यह केंद्र बेहतर सुविधाएं रोगियों को प्रदान कर रहा है। 

लाभार्थियों की कहानी उन्हीं की जुबानी – केस-1 जौनपुर के रहने वाले 70 वर्षीय मंजीत उपाध्याय पिछले 10 सालों से फाइलेरिया से ग्रसित हैं। काफी दिनों से वह ऐलोपेथिक उपचार करवा रहे थे लेकिन कोई आराम नहीं था। धीरे-धीरे पैरों की हालत गंभीर हो रही थी। वह इसको ठीक कराने में हार मान चुके थे। इस साल अप्रैल में उनके ही जानने वाले एक फाइलेरिया रोगी जो यहाँ से ठीक होकर गए थे, उनसे मुलाक़ात हुई। बातचीत होने के बाद उन्होंने इसी केंद्र में उपचार शुरू कराया। भर्ती के समय ग्रेड 4 (आईएसएल-3) से लेकर सूजन आदि में 31 प्रतिशत की कमी आई है। उपचार व फॉलो अप पूरा हो चुका है। अब वह घर पर रहकर विशेष देखभाल कर रहे हैं। जिससे वह धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। घर में किसी को भी यह बीमारी नहीं है। 

केस-2 ऐसे ही प्रयागराज से आए 47 वर्षीय रमेश (काल्पनिक नाम) करीब 23 साल से फाइलेरिया के रोग से ग्रसित हैं। पिछले चार-पाँच सालों से अपने दोनों पैरों में अधिक सूजन व घाव से काफी परेशान हैं। लेकिन उनकी इस परेशानी को दूर करने में आईएडी केंद्र और प्रयागराज के जिला मलेरिया अधिकारी डॉ आनंद सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्हीं की मदद से वह अपने ग्रेड 7 (आईएसएल-3) का उपचार दो अगस्त से केंद्र पर करा रहे हैं। सीएमओ की उपस्थिती में भर्ती के समय उनका वजन करीब दो सौ किलोग्राम था और चलने में भी असमर्थ थे। लेकिन केंद्र पर मिल रहे उपचार के दौरान उनका पैर 50 फीसदी तक ठीक हो चुका है।

 साथ ही उनके जीवन स्तर में 70 फीसदी सुधार हुआ है जिससे वह और उनके परिवार वाले काफी खुश हैं।यह है सुविधाएं –केंद्र पर विभिन्न आयुर्वेदिक थेरेपी, एलोपैथ, योगा की एकीकृत पद्धति व आहार परामर्श से भर्ती रोगियों का सात, 14 व 21 दिन तक उपचार किया जा रहा है। इसके साथ ही भर्ती रोगियों के ठहरने और खाने की व्यवस्था प्रदान की जा रही है। उपचार पूरा होने के बाद रोगी का तीन माह तक फॉलो-अप किया जाता है। इस एक दिवसीय फॉलो अप में रोगी की पुनः सम्पूर्ण मेजरमेंट, आयुर्वेदिक थेरेपी, योगा, मसाज तथा आहार परामर्श से उपचार किया जाएगा। सरकार का प्रयास है

 कि रोगी को जल्द से जल्द हाथीपाँव से छुटकारा दिया जाए। रोज़ होती है सम्पूर्ण उपचार प्रक्रिया –भर्ती फाइलेरिया (हाथी पाँव) रोगियों की प्रतिदिन समय के अनुसार सम्पूर्ण उपचार प्रक्रिया होती है। इसमें रोगी की मेजरमेंट, साफ-सफाई, आयुर्वेदिक थेरेपी फांटा सोकिंग (घोल प्रक्रिया), योगा, कंप्रेशन और अंत में पुनः योगा व मसाज प्रतिदिन की जाती है। यहाँ कर सकते हैं संपर्क – फाइलेरिया (हाथी पाँव) संबंधी स्क्रीनिंग, उपचार आदि के लिए चौकाघाट स्थित फाइलेरिया एकीकृत उपचार केंद्र वाराणसी के हेल्पलाइन नंबर 9567283334 पर प्रत्येक दिन सुबह नौ से सायं पाँच बजे तक संपर्क किया जा सकता है।

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