महाकवि विद्यापति में बही मिथिला संस्कृति कि गंगा

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 वाराणसी।मैथिल समाज,उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित 13 वें महाकवि विद्यापति महोत्सव का उद्घाटन नागरीप्रचारिणी सभा, मैदागिन, वाराणसी में माननीय अशोक तिवारी महापौर, वाराणसी द्वारा महाकवि विद्यापति के चित्र पर दीप प्रज्जवलन कर किया गया। तत्पश्चात् संस्था के अध्यक्ष निरसन कुमार झा, एडवोकेट ने महापौर को को महाकवि विद्यापति का चित्र, पाग, दुपट्टा, माला पहनाकर सम्मानित किया।


समारोह के मुख्य अतिथि अजय झा (एनआरआई उद्योगपति,गुआना,अमेरिका) ने कहा कि मिथिला ज्ञान विज्ञान का केन्द्र प्राचीनकाल से रहा है। गौतम ऋषि, याज्ञवल्क्य,महान् अर्थशास्त्री,चाणक्य, महान् दार्शनिक मण्डन मिश्र जैसे विद्वानों की भूमि मिथिला रही है, जिन्होंने अपने ज्ञान के प्रकाश से सम्पूर्ण भारत को गौरवान्वित किया है। सही मायने में मिथिला कि संस्कृति ही भारत समपूर्ण भारत कि संस्कृति है|

मुख्य वक्ता पद से बोलते हुए बेगूसराय (बिहार) के शिक्षाविद डा अच्युतानंद पाठक ने कहा कि महाकवि विद्यापति विलक्षण प्रतिभा के कवि थे। कर्मकाण्ड हो या धर्म, दर्शन या न्याय, सौन्दर्यशास्त्र हो या भक्ति रचना, विरह व्यथा हो या न्याय सभी क्षेत्रों में विद्यापति अपनी रचनाओं के लिये जाने जाते है।अध्यक्ष पद से बोलते हुए ख्यात जल वैज्ञानिक प्रो0 उदयकांत चौधरी ने कहा कि कवि कोकिल विद्यापति भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। विद्यापति की भक्ति भावना उनके वाक्य में स्पष्ट दिखायी देती है। 



विद्यापति की भक्ति से खुश होकर साक्षात् भगवान शिव चारवाहा का भेस धारण कर उनके काव्य को सुनने के लिये उगना के रूप में उनके आश्रम में चाकरी करते थे। जब शिव के वास्तविक स्वरूप का विद्यापति का हुआ तो वो उगना (शिव) अन्तध्यान हो गये। भगवान शिव शंकर के वियोग में ही विद्यापति ने उगना महादेव की स्थापना विष्पी गाँव में की। विद्यापति पदावली, मणि मंजरी, भूपरिक्रमा, कीर्तिलता, शैव सर्व स्वसार, कीर्ति पताका विद्यापति की प्रमुख रचनाये हैं। 



महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारम्भ झारखण्ड राज्य की ख्यात गायिका डेजी ठाकुर द्वारा गाये जय जय भैरवी और इहेन सुन्दर मिथिला धाम से हुई |डा विजय कपूर ने उगना हमर कतह गेला और देसिल बयना सब जन मिट्ठा आदि विद्यापति रचित रचनाओं को गाकर दर्शकों कि वाहवाही लूटी| बृष्टि चक्रवर्ती के नृत्य निर्देशन में मिथिला का लोकनृत्य में विद्यापति की रचना जय जय भैरवी पर भावपूर्ण नृत्य, लोक महापर्व डाला छठ पर भावपूर्ण नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति कलाकारों ने दी।




विशिष्ट अतिथि के रूप में  प्रो आर आर झा,नागरीप्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल,प्रो०शंकर मिश्र (पूर्व विभागाध्यक्ष,धर्म मीमांसा विभाग, बीएचयू), समाजसेवी प्रेमानंद मिश्र, प्रो.प्रभात मिश्र, प्रो.अशोक ज्योति हड्डी रोग विशेसज्ञ डा आलोक चौधरी शामिल रहे।समारोह का संचालन व संयोजन गौतम कुमार झा (एडवोकेट) ने किया| स्वागत काशी राज परिवार के जमाता डा अशोक सिंह ने तथा धन्यवाद संस्था के अध्यक्ष निरसन कुमार झा (एडवोकेट) ने किया।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से ख्यात चित्रकार दास पुष्कर, सुधीर चौधरी,भोगेन्द्र झा, नटवर झा,अनीशा शाही आदि शामिल रहे। समारोह में मिथिला पेंटिंग, सिक्की पेंटिंग, पाग और मिथिला साहित्य का स्टाल लोगों के आकर्षण का केन्द्र रहा।

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