तुलसीदास ने कराया जनसंचार की शक्ति का अनुभव : प्रो. ए०के० त्यागी

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भारत की संकल्पना में हमेशा रहेगा पत्रकारिता का सिद्धांत : डॉ. राम प्रवेश राय 


वाराणसी।। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में भारतीय पत्रकारिता दिवस के अवसर पर 'भारत की संकल्पना एवं भारतीय पत्रकारिता ' विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम का शुभारम्भ महात्मा गाँधी और डॉ. भगवान दास के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विद्यापीठ के कुलपति प्रो. ए.के. त्यागी ने कहा भारतीय पत्रकारिता की बात करनी है तो भारत के स्वरूप को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि यहाँ एक-एक कोस पर बोली बदल जाती है।

सूचना का आदान-प्रदान भाषाई आधार पर यूरोप के लिए आसान है, क्योंकि वहां भौगोलिक विषमताएं कम हैं। भाषा में विविधता कम है। वहां सूचना प्रसारित करने के लिए ज्यादा संसाधन की जरूरत नहीं है, परन्तु भारत में सूचना प्रसारित करना आसान नहीं है। यहाँ विविधताएं बहुत हैं, भारतीय भाषाओं की लिपियाँ भिन्न-भिन्न हैं।

उन्होंने सम्भावनाओं को लेकर कहा हमारे यहाँ चुनौतियाँ बहुत हैं,परन्तु इससे सम्भावनाएं भी बढ़ती हैं।भारत की सांस्कृतिक विरासत हर क्षेत्र की अलग है, इसलिए सूचनाओं का मानक बदलना पड़ता है।जनसंचार के बारे में उन्होंने कहा इसकी शक्ति का अनुभव हम तुलसीदास जी की लिखी मानस के द्वारा कर सकते हैं, जिन्होंने देश के कोने-कोने तक अपनी लिखी हुई बात पहुंचाई। आज देश में शायद ही कोई ऐसा हो जिसे मानस की दो-चार चौपाई याद न हो। यही जनसंचार की शक्ति है। इसका उपयोग कैसे करना है यह समझने से पहले भारत की संकल्पना को समझना होगा। भारतीय पत्रकारिता यूरोप जैसी नहीं है। भारत को पत्रकारिता में क्या चाहिए यह समझने की जरूरत है। इसी कड़ी में मुख्य वक्ता डॉ. राम प्रवेश राय ने कहा कि पहले बोलकर हम संचार करते थे। बाद में लिपि का विकास हुआ और ज्ञान परम्परा की शुरूआत हुई। लिखने से आगे बढ़े तो तकनीक का विकास हुआ और कैमरा आ गया। पूरा इको सिस्टम चेंज हो रहा है। उन्होंने कहा पूरे देश की समस्या पत्रकार की समस्या है, इसलिए दुनिया कहीं भी चली जाये, लेकिन भारत की संकल्पना एवं पत्रकारिता का सिद्धांत हमेशा रहेगा। कार्यक्रम की अगली कड़ी में प्रो. अनुराग कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि जब कारपोरेट जगत नहीं था तो सांस्कृतिक बहुलताओं और भाषाई स्तर पर पत्र-पत्रिकाओं ने ही युद्ध लड़ा था। आज आधुनिकीकरण में समाजिकता कहां है, यह भी देखना जरुरी है।

उन्होंने कहा  मै उन पत्रकारों को नमन करता हूँ जिन्होंने सुखद पत्रकारिता को समझने का अवसर दिया।

कार्यक्रम का संचालन रमेश कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनोद कुमार सिंह ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. प्रभा शंकर मिश्र, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. मनोहर लाल एवं वैष्णवी, श्रुति, लाइबा सिद्दकी, शैलूशी, अभिषेक, आशुतोष, ऋषभ, साक्षी, दिया, आयुष, स्वाति, अर्पिता, शिखा साहिल, हिमांशु, रिद्धि, विधृति मिश्रा सहित अनेक छात्र- छात्राओं की उपस्थिति रही।

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