भारत की भोर का प्रथम स्वर हैं "राम :कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा

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वाराणसी।राम सिर्फ दो अक्षर का नाम नहीं, राम तो प्रत्येक प्राणी में रमा हुआ है, राम चेतना और सजीवता का प्रमाण है।अगर राम नहीं तो जीवन मरा है। राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है।


उक्त विचार  सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने अयोध्या में मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र जी के श्री विग्रह के प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व संध्या पर सम्पूर्ण परिसर में झालरों और दीपों से सजावट तथा परिसर स्थित पंच देव मंदिर,वाग्देवी मंदिर तथा सती माता मंदिर की सजावट तथा दिनाँक 22 जनवरी 2024 को विधि-विधान से सुन्दर कांड के साथ पूजन कराने का निर्देश दिया।

कुलपति प्रो शर्मा ने बताया कि श्रीराम इस राष्ट्र के प्राणतत्व हैं। भारत की भोर का प्रथम स्वर हैं राम। जो राष्ट्र का मंगल करे, वही राम हैं। जो लोकमंगल की कामना करे, वही राम हैं। जहां नीति और धर्म है, वहां श्रीराम हैं। संयम, शांति, सौहार्द, सांप्रदायिक-एकता एवं समन्वय ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है! श्रीराम साक्षात धर्म विग्रह हैं! राम एक ऐसा दीप हैं, जो कभी बुझ नहीं सकता। राम भारत की कालजयी सनातन संस्कृति का मेरुदंड हैं। श्रीराम के अवलंबन का अर्थ मर्यादा, शील, चरित्र और संयम का अनुगमन है!



उन्होंने कहा कि यह संस्था देववाणी संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति एवं संस्कार एवं भारतीयता की भूमि है यहां पर विश्वविद्यालय परिवार दीपावली के उत्सव जैसा परिवेश का निर्माण कर प्रत्येक घर में दीपक और सुन्दर प्रकाश से प्रकाशित करे।सम्पूर्ण परिसर मे रंगबिरंगे झालरों  से सजावट कर आज से ही दीपावली का बोध होने लगा है ,मुख्य भवन को भी झालरों से सजावट कर रात्रि में भी दिन का एहसास हो रहा है।

सुन्दर कांड एवं पूजन के लिये सहायक आचार्य डॉ सत्येंद्र कुमार यादव को संयोजक तथा पुजारी डॉ राजकुमार मिश्र को सह संयोजक बनाया गया।

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