जहां मां सरस्वती विराजमान रहती हैं उस जगह मां लक्ष्मी अवश्य वास करती हैं :कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा

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वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत,विश्वविद्यालय,वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को परिसर में स्थापित मां वाग्वदेवी मंदिर में पूजा की। इस दौरान कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने विश्वविद्यालय के अभ्युत्थान और राष्ट्र कल्याण की कामना के साथ कहा कि मां सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है।


इनकी पूजा करने से व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में बुद्धि का संचरण होता है। ऐसा कहा जाता है कि जहां मां सरस्वती विराजमान रहती हैं। उस जगह मां लक्ष्मी अवश्य वास करती हैं।ब्रह्मा जी के कुंडल से संगीत की देवी का अवतरण हुआ था ।कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि आज के पर्व में इस विद्या मन्दिर में माँ सरस्वती के अवतरण दिवस के रुप में पूजन राष्ट्र कल्याण एंव राष्ट्र अभ्युदय के लिये किया जाता है। आज माघ पंचमी के दिन ऋग्वेद मे ऐसा वर्णित है कि ब्रह्मा जी के कुंडल से संगीत की देवी का अवतरण हुआ था। ग्रंथों के अनुसार मां सरस्वती ब्रह्मस्वरूपा, कामधेनु और समस्त देवों की प्रतिनिधि हैं। यह पूजन विद्यार्थियों के तम को दूर करने और बुद्धि, विवेक,ज्ञान, संगीत ज्ञान, नृत्य कला आदि के वृद्धि व अभ्युदय के लिये किया जाता है।  आज विश्वविद्यालय परिवार यह पूजन सभी विद्यार्थियों, समाज के सद्भाव,और राष्ट्र कल्याण के लिये किया जा रहा है।


माँ सरस्वती जी विद्या व ज्ञान की अधिष्ठात्री, शान्ति और अहिंसा की देवी हैं कुलपति प्रो शर्मा जी ने कहा कि माँ सरस्वती जी विद्या व ज्ञान की अधिष्ठात्री, शान्ति और अहिंसा की देवी हैं,मनुष्य को सदैव धर्म के मार्ग पर जाने की प्रेरणा देती है। मां के श्लोकों से शीतलता का भाव स्वतः उत्पन्न होता है। पूजन समारोह में वैदिक विद्यार्थियों के द्वारा विधिवत मन्त्रोच्चार,मंगलाचरण एवं पूजन किया गया। संगीत विभाग के द्वारा भजन सन्ध्या का कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।


 विभिन्न वक्ताओं ने शास्त्रों मे वर्णित मां सरस्वती जी के महात्म का वर्णन भी किया।यजमान के रूप में कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा जी द्वारा माँ वाग्देवी जी का षोडशोपचार विधि से पूजन किया गया।पूजन से पहले मन्दिर के पुजारी डॉ सच्चिदानंद पान्डेय ने माँ वागदेवी का विधि विधान व मन्त्रोच्चार के साथ श्रृंगार किया।इस दौरान प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ हृदय नारायण पाण्डेय,प्रो महेंद्र पाण्डेय, प्रो दिनेश कुमार गर्ग,संतोष कुमार दुबे व भारी संख्या मे अध्यापक, विद्यार्थी,कर्मचारी आदि उपस्थित थे।

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