वरूणा गार्डन के फ्लेटो में हुई चोरी का सफल अनावरण, कैण्ट पुलिस,एस0ओ0जी0 व सर्विलांस की संयुक्त पुलिस टीम ने अभियुक्त को किया गिरफ्तार

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वाराणसी।पुलिस आयुक्त वाराणसी के चोरी/लूट की घटनाओ के सफल अनावरण एवं वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी व हेतु चलाये जा रहे अभियान के क्रम में पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के निर्देशन में अपर पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के पर्यवेक्षण में एवं सहायक पुलिस आयुक्त कैण्ट के नेतृत्व में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य व मुखबिर की सहायता से कमिश्नरेट वाराणसी के थाना कैण्ट, एस०ओ०जी० व सर्विलांस की संयुक्त पुलिस टीम द्वारा- 1-318/23 धारा 457,380 भा०द०वि० बढ़ोत्तरी धारा 411 भा0द0वि0, 2-मु0अ0सं0- 38/2024 धारा 380 भा०द०वि० बढ़ोत्तरी धारा 457,411 भा०द०वि० व 3-मु0अ0सं0-40/24 धारा 380 भा०द०वि० व बढ़ोत्तरी धारा 457,411 भा0द0वि0 थाना कैण्ट कमिश्नरेट वाराणसी से संबंधित वांछित शातिर अभियुक्त 1 आशीष रावत पुत्र भरत लाल रावत निवासी कुआर बाजार थाना फूलपुर जनपद वाराणसी को इमलिया घाट फुलवरिया थाना कैण्ट से दिनांक- 25/03/2024 को समय करीब 21.30 बजे गिरफ्तार किया गया।


अभियुक्त के कब्जे से चोरी गये आभूषण व घटना मे प्रयुक्त विभिन्न औजार को बरामद कर थाना कैण्ट पुलिस द्वारा आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को  पुलिस उपायुक्त वरुणा ज़ोन महोदय द्वारा 10,000/- रु0 इनाम की घोषणा की गयी।अभियुक्त आशीष रावत ने पूछताछ करने पर बताया कि मैं यही बनारस फूलपुर का रहने वाला हूँ और कुछ सालों से दिल्ली में रह कर यूपीएससी की तैयारी चाणक्य कोचिंग में कर रहा हूँ। 




वहाँ रहते हुए मेरी संगत गलत हो गयी थी, जिससे मेरे खर्चे व शौक भी गलत हो गये थे, उनकी पूर्ति के लिए मैं चोरी करने लगा। मैं सिकरौल के पास स्थित वरुणा गार्डन अपार्टमेन्ट जिसमें मेरे रिश्तेदार राजेन्द्र वारी का फ्लैट है जो महाराष्ट्र में रहते हैं, जब वह बाहर जाते थे तो अपने फ्लैट की चाबी वो मुझे दे जाते थे। मैं रात में घूमने-टहलने के बहाने जाकर पहले बन्द फ्लैटों की रेकी करता था फिर मौका देखकर अलग-अलग ब्लॉक में जाकर जिस फ्लैट के अन्दर की लाइट नही जल रही होती थी, उसके दरवाजे पर लगी घण्टी बजाकर देखता था, जब काफी देर तक कोई दरवाजा नहीं खोलता तो मुझे पता चल जाता कि इस प्लैट में कोई नही है। उसके बाद मैं अपने पास मौजूद लोहे की राड व अन्य औजार की सहायता से दरवाजे को चांढकर खोल लेता था और अंदर घुसकर सारे घर की तलाशी लेकर ज्यादातर सोने के गहने, रुपये जो भी मिलता था उसे चुराकर मौका पाकर निकल जाता था।




 नीचे गार्ड के पूछने पर उन्हे अपने रिश्तेदार राजेन्द्र वारी का नाम व उनका फ्लैट नम्बर ए 803 बता देता था कि उसमें मेरे रिश्तेदार रहते हैं। कुछ सामान मैने मेरी माँ व पिता की मृत्यु हो जाने के बाद उनका गहना बताकर स्थानीय बाजार मे बेच दिया था, जब मैं अपनी माँ के गहने बताकर बेंचता था तो अपने दोस्त राजू जो मेरे गांव का ही रहने वाला था उसी भी ले गया था, उसका रुपया उन्होने मुझे धीरे-धीरे मेरे खाते में ही दिया था व कुछ रुपया यारी दोस्ती व शराब पीने-खाने, अय्याशी व घूमने-फिरने में खर्च कर दिया तथा शेष जो बचा है वह मेरे खाते में ही है। चोरी करने के बाद में चोरी के कुछ गहने दिल्ली आते-जाते समय ट्रेन में राहगीरों को दिखाकर व मजबूरी बताकर बेच देता था। मैंने कुछ सामान को पहले ही राहगीरों को बेच दिया था व कुछ गहनों को मैने गला दिया है ताकी बेचने में आसानी हो, बाकी कुछ गहने अभी बचें हैं 




जो इस झोले में हैं।गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम प्रभारी निरीक्षक अजय राज वर्मा,प्रभारी निरीक्षक करंटउ0नि0 पवन कुमार पाठक,उ0नि0 आयुष पाण्डेय, उ0नि0 आशीष श्रीवास्तव थाना कैण्ट, हे0 का0 बृजबिहारी ओझा,का0 सचिन मिश्रा थाना कैण्ट  का0 अमित कुमार थाना कैण्ट कमिश्नरेट वाराणसी।एसओजी टीम-उ0नि0 मनीष मिश्रा (प्रभारी)उ0नि0 गौरव कुमार सिंह, का0 रमाशंकर यादव,का0 आलोक कुमार मौर्या,का0 अंकित मिश्रा,का0 प्रेमशंकर पटेल सर्विलांस सेल-हे0का0 दिवाकर वत्स. हे0का0 संतोष पासवान,आरक्षी मनीष कुमार

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