देव दीपावली पर काशीवासियों को प्राप्त हुआ ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य महाराज का सान्निध्य व शुभाशीष

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वाराणसी :कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विश्वप्रसिद्ध देवदीपावली के आयोजन के दौरान काशीवासियों का हर्ष व उत्साह परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज का पावन सानिध्य व शुभाशीष पाकर दुगना हो गया।


शंकराचार्य घाट पर स्थित श्रीविद्यामठ में प्रवास कर रहे,ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज ने काशीवासियों द्वारा देवदीपावली के असवर पर दीपदान व दीपों से अद्भुत सजावट का अवलोकन किया।साथ ही अपने एक सन्देश में काशीवासियों को हृदय से उनके सर्वमंगल व सर्वविधि कल्याण हेतु अपनी मंगलकामनाएं व शुभाशीष सम्प्रेषित किया।


साथ ही शंकराचार्य जी महाराज ने गंगा पूजन व दीपदान किया व गंगा आरती में भी सम्मलित हुए।आज सुबह से ही श्रीविद्यामठ में  शंकराचार्य जी महाराज का दर्शन पूजन करने हेतु भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी।


ज्ञातव्य है कि शंकराचार्य जी महाराज दीपावली छत्तीसगढ़ के भक्तों के साथ मनाते हैं।इसलिए काशीवासी भक्त दीपावली के दिन शंकराचार्य जी महाराज के सानिध्य से वंचित रह जाने व उनके साथ दीपावली न मना पाने कारण मायूस हो जाते हैं।इसलिए आज देवदीपावली के दिन श्रीविद्यामठ में आज के दिन दीपावली भी मना कर हर्षित होते हैं और शंकराचार्य जी महाराज का सानिध्य पाकर खुद को धन्य महसूस करते हैं।आज भक्तों ने पूरे श्रीविद्यामठ में दीपों व झालर से सजा दिया था जिसकी छटा देखते ही बनती थी।


मध्यप्रदेश परमहंसी गंगा आश्रम से पधारे ब्रम्हलीन द्वयपीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपनान्द सरस्वती जी महाराज के विद्वान शिष्य निर्विकल्प स्वरूप महाराज ने काशीवासियों को दिए एक सन्देश में कहा कि देवता हमेशा देते हैं और वो प्रकाशमय हैं।जो सीमित देता है उसे देव व जो असीमित देता है उसे महादेव कहते हैं।काशी देवाधिदेव महादेव की नगरी है।महादेव काशी में शरीर का त्याग करने वाले जीवों को तारक मन्त्र का उपदेश देकर माया के कारण उनके हृदय में बुझ चुकी ज्योति को प्रज्ज्वलित कर देते हैं।जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।


समस्त कार्यक्रम में प्रमुख रूप से  साध्वी पूर्णाम्बा दीदी, साध्वी शारदम्बा दीदी, ब्रम्ह्चारी मुकुंदानंद,मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय,प्रधान पुरुषेश्वरा महाराज,निर्विकल्प स्वरूप महाराज,पं रवि त्रिवेदी,रमेश उपाध्याय, ब्रम्ह्चारी परमात्मानंद,विवेक भूषण तिवारी,हजारी कीर्ति शुक्ला,हजारी सौरभ शुक्ला, कृष्णा पराशर,प्रशांत भूषण तिवारी,अनुराग शर्मा सहित हजारों की संख्या में भक्त व संत उपस्थित थे।

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