महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 45 वां दीक्षांत समारोह में महामहिम राष्ट्रपति ने कहा काशी विश्व में सबसे जीवंत नगरी में से एक

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वाराणसी । काशी विद्यापीठ का 45वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। 45 वें दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी थी।


दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल उत्तर प्रदेश श्रीमती आनंदीबेन पटेल एवं कुलपति काशी विद्यापीठ ने किया।कैबिनेट मंत्री उच्च शिक्षा, योगेंद्र उपाध्याय एवं राज्य मंत्री,उच्च शिक्षा श्रीमती रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में सम्मिलित हुए।

दीक्षांत समारोह के शुभारंभ की घोषणा कुलाधिपति द्वारा करने के पश्चात महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो.आनंद कुमार त्यागी द्वारा स्वागत संबोधन एवं प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। कुलपति द्वारा अपने स्वागत संबोधन में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की प्रगति का विवरण देते हुए बताया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा अकादमिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों का भी निर्वहन किया जा रहा है,

विश्वविद्यालय न सिर्फ शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास हेतु कार्य कर रहा है बल्कि दूर दराज के अति पिछड़े क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए भी शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रयत्नशील है। ऐसे इलाके जहां आदिवासी जनसंख्या की बहुलता है वहां पर आदिवासी विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है तथा कुछ महाविद्यालयों द्वारा आदिवासी विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा भी प्रदान की जा रही है

जिसका प्रतिफल यह है कि पिछले 5 वर्षों में आदिवासी विद्यार्थियों के नामांकन में अत्यंत तेजी से वृद्धि हुई है,जिसमें छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। दीक्षांत समारोह में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा कुल 77692 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने की घोषणा की गई, जिसमें 65089 स्नातक, 12529 स्नातकोत्तर, 73 पी.एच.डी. एवं एक डी. लिट. की उपाधि शामिल थी,

स्नातक स्तर पर एक विद्यार्थी ट्रांसजेंडर श्रेणी का भी है।दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि  राष्ट्रपति जी  एवं कुलाधिपति द्वारा मंच पर 15 विशिष्ट पदक विद्यार्थियों को प्रदान किए गए जिसमें 11 पदक छात्राओं को तथा 4 पदक छात्रों को प्राप्त हुए। वर्ष 2023 में कुल 65 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए जाने की घोषणा की गई जिसमें 51 छात्राएं तथा 14 छात्र सम्मिलित हैं।

कुलपति द्वारा दीक्षा उपदेश दिए जाने के पश्चात विद्यार्थियों को पदक का वितरण कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय के द्वारा कराया गया। दीक्षांत समारोह में कल 77692 उपाधियां को डीजीलॉकर पर अपलोड किए जाने की प्रक्रिया का शुभारंभ भारत की राष्ट्रपति जी द्वारा किया गया।दीक्षांत समारोह में अपने दीक्षांत उद्बोधन में कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने काशी के अर्थ को स्पष्ट करते हुए काशी में उत्साह पूर्वक मनाएं जाने वाले विशेष पर्वों पर अपना विचार रखा तथा विद्यापीठ में इस वर्ष सफल हुए स्नातकों को संबोधित करते हुए कुलाधिपति ने काशी विद्यापीठ और इसके महात्म एवं स्थापना के उद्देश्यों को प्रकाश डाला,

आगे उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जी के कर कमलों से स्थापित यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों में सम्मिलित मातृभाषा में शिक्षा की पूर्णता अपनी स्थापना काल से ही करता आ रहा है।कुलाधिपति ने विद्यार्थियों के राष्ट्र प्रेम एवं चरित्र निर्माण पर जोर देने की बात कही साथ ही विद्यापीठ द्वारा शोध, एम. ओ. यू., विद्यार्थियों का कैंपस प्लेसमेंट द्वारा रोजगार की प्राप्ति, कौशल विकास के लिए उचित माहौल उपलब्ध कराने की दिशा में किए गए प्रयास की सराहना की।

काशी विद्यापीठ की स्थापना के 102 वर्ष के पश्चात यह प्रथम अवसर था जब भारत के राष्ट्रपति द्वारा दीक्षांत भाषण दिया गया। राष्ट्रपति महोदय ने अपने उद्बोधन में विद्यापीठ की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि  तृलोक्य  नगरी काशी में राष्ट्रपति महात्मा गांधी जी के कर कमलों से 102 वर्ष पूर्व स्थापित ऐतिहासिक महाविद्यालय महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 45 वें दीक्षांत को मुझे अपार हर्ष की अनुमति हो रही है काशी अर्थात वाराणसी विश्व के सबसे प्राचीन जीवंत नगरों में से एक है काशी अध्यात्म विद्या का मूल स्रोत एवं भगवान बुद्ध के काल के पूर्व से ही अपने ज्ञान के लिए प्रसिद्ध है।मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने पुरातन एवं नवीन का  अद्भुत संगम स्थापित करने का प्रया एस किया है दीक्षांत समारोह की शोभा नि:संदेह विद्यार्थी ही होते हैं

इस पावन अवसर पर मैं उन सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं देना चाहती हूं जिन्होंने पुरस्कार पदक एवं विशिष्टता प्राप्त की है।उन्होंने काशी विद्यापीठ की उपलब्धियां को बताते हुए कहा कि 10 फरवरी 1921 को महात्मा गांधी की प्रेरणा से बापू शिव प्रसाद गुप्त और डॉक्टर भगवान दास ने वाराणसी में इस काशी विद्यापीठ की स्थापना की थी तथा आगे चलकर सन 1995 में अपने प्रेरणा स्रोत का नाम जोड़कर यह संस्था काशी विद्यापीठ के नाम से विख्यात हुई है

महात्मा गांधी विद्यापीठ भारत के उन प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक है जिसका उद्देश्य ऐसी शिक्षा प्रदान करना है जो विशिष्ट भारतीय वैचारिक की के अनुकूल हो तथा जिनके द्वारा राष्ट्रीय सेवा के संस्कारों का निर्माण हो सके बाबू शिव प्रसाद गुप्त के संकल्प से स्थापित मां सरस्वती के इस मंदिर को आधारशिला महात्मा गांधी द्वारा रखी गई थी अपनी स्थापना काल से ही इसका उद्देश्य भारत के प्राचीन आध्यात्मिक जीवन दर्शन पर आधारित संस्कृति और सभ्यता का विकास एवं प्रचार करना तथा आदर्श सर्व भौतिक भाईचारे की भावना एवं ज्ञान के माध्यम से समाज की सेवा करना है आगे उन्होंने कहा कि दो दो भारत रत्न इसी विद्यापीठ के अंग रहे हैं ।

राष्ट्रपति जी ने बताया कि हिंदी माध्यम से उच्च शिक्षा प्रदान किए जाने हेतु राष्ट्र रत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त ने महात्मा गांधी से चर्चा किया जिसके परिणाम स्वरूप इस विद्यापीठ की स्थापना हुई। विद्यापीठ असहयोग आंदोलन से उत्पन्न संस्था के रूप में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का जीवंत उदाहरण है ।

अपने उद्बोधन राष्ट्रपति जी ने विद्यापीठ के पूर्व आचार्यों तथा विद्यार्थियों के योगदानों की भी चर्चा की। 45 वें दीक्षांत समारोह में छात्रों की तुलना में छात्राओं को अधिक पदक प्राप्त होने पर छात्राओं को अपना आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राहुल गुप्ता द्वारा किया गया। 45 वें दीक्षांत समारोह में मंत्री रविन्द्र जायसवाल , काशी नरेश अनंत नारायण सिंह,प्रो. डी.एस.चौहान,अंबुज गुप्त, विद्यापीठ सभा, कार्यपरिषद ,विद्यापरिषद के सदस्य गण, शिक्षक गण,अभिभावक गण, विद्यार्थीगण,कर्मचारीगण इत्यादि उपस्थित थे।

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