जन्म पंजीकरण में वाराणसी ने हासिल किया यूपी में पहला स्थान

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सीआरएस पोर्टल पर डाटा फीडिंग में प्राप्त की 157 फीसदी की उपलब्धि


वराणसी। जनपद में जन्म व मृत्यु पंजीकरण सेवाओं में लगातार सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण सुधार देखने को मिल रहा है। इसका यह परिणाम है कि भारत सरकार द्वारा संचालित सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) पोर्टल पर वाराणसी ने उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। स्वास्थ्य भवन लखनऊ से प्राप्त वर्ष 2024 के फरवरी माह के प्रथम सप्ताह में प्राप्त आंकड़ों में जनपद ने सीआरएस पोर्टल पर किए गए जन्म पंजीकरण के कार्य में प्रदेश के सापेक्ष अधिक उपलब्धि (157 प्रतिशत) हासिल की है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी सीएमओ ने बताया कि जन्म मृत्यु पंजीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत सीआरएस पोर्टल पर जन्म व मृत्यु के घटनाओं का पंजीकरण किया जाता है। लक्ष्य के आधार पर सीआरएस पोर्टल पर किये गये सभी जन्म के पंजीकरण हेतु प्रदेश स्तर पर साप्ताहिक रैंकिंग निर्धारित की जा रही है। 

      जनपद स्तर पर इसकी समीक्षा जिलाधिकारी एस. राजलिंगम एवं मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल के द्वारा विभिन्न बैठकों में की जा रही है। उनके निर्देशन में जनपद में नामित समस्त जन्म-मृत्यु रजिस्टारों के द्वारा समयानुसार जन्म का पंजीकरण किया जा रहा है। नगर निगम, पंचायती राज, एवं राजकीय चिकित्सालय के जन्म-मृत्यु पंजीकरण रजिस्टारों का ही प्रयास है कि वाराणसी ने प्रदेश में 157 फीसदी अंक प्राप्त करते हुये प्रथम स्थान हासिल किया है। जबकि समस्त प्रदेश की उपलब्धि 76 फीसदी दर्ज की गई है। इस उपलब्धि के लिए सीएमओ ने जन्म व मृत्यु का पंजीकरण कर रहे जन्म- मृत्यु रजिस्टारों एवं उनके सहयोगी कर्मियों के कार्यों की सराहना की और भविष्य में इसी जोश व उत्साह के साथ कार्य करने की उम्मीद जताई। सीएमओ ने बताया कि जन्म एवं मृत्यु की प्रत्येक घटना को पंजीकृत किया जाना कानूनन अनिवार्य कर दिया गया है। भारत में सिविल रजिस्ट्रेशन प्रणाली, जो देश में संवैधानिक संदर्भ का अनुसरण करते हुए जन्म और मृत्यु की सतत् और स्थायी रिकार्डिंग है। वर्ष 1969 में एक केन्द्रीय अधिनियम, जो कि जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1969 के नाम से जाना जाता है, लागू किया गया, जिसने देश में जन्म मृत्यु रजिस्ट्रीकरण संबंधी प्रचलित भिन्न-भिन्न कानूनों का स्थान लिया। इस अधिनियम ने पूरे देश में रजिस्ट्रेशन प्रणाली को एकीकृत कर  जन्म व मृत्यु रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र घटना घटित होने के तथ्य और स्थान व तारीख का स्थायी लेखा-जोखा है। घटना के रजिस्ट्रेशन में जन्म और मृत्यु रजिस्टर से निर्धारित उद्धरणों का रजिस्ट्रीकरण पूर्ण होते ही जारी होना शामिल है। जन्म प्रमाण पत्र राष्ट्रीयता का कोई सबूत नहीं है। सीएमओ ने सभी जनपदवासियों से अपील की है कि अपने क्षेत्र में होने वाली सभी जन्म और मृत्यु की घटनाओं का पंजीकरण अवश्य कराएं।

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