नियमित दवा खाने का क्रम न छूटे, नहीं तो बढ़ेगी टीबी की बीमारी

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वाराणसी ।राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत जनपद में क्षय रोगियों के उपचार व पोषण पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही किसी भी क्षय रोगी की नियमित दवा खाना न छूटे, इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।


इसके मद्देनजर शासन स्तर से प्राप्त दिशा-निर्देशों के क्रम में स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय स्तर पर ड्रग सेंसेटिव टीबी (डीएसटीबी) रोगियों के उपचार में उपयोग की जाने वाली दवाओं यानि फिक्स डोज़ कोंबिनेशन (एफ़डीसी) का क्रय कर लिया गया है। जल्द ही सभी टीबी रोगियों को उनके टीबी यूनिट में दवा प्राप्त होने लगेगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश के निर्देश के क्रम में स्वास्थ्य विभाग ने प्राप्त बजट के अनुसार टीबी की फोर एफ़डीसी और थ्री एफ़डीसी की दवाएं स्थानीय स्तर पर क्रय कर ली हैं। जनपद के शिवपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) स्थित टीबी ड्रग स्टोर में पहुँच चुकी है। 



जल्द ही ये दवाएं समस्त 23 टीबी यूनिट में पहुंचाई जाएंगी, जिससे यूनिटवार उपचाराधीन क्षय रोगियों को आवश्यकतानुसार दवा मिल सकें।जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ पीयूष राय ने बताया कि शासन के निर्देश एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी के समन्वयन से फोर एफ़डीसी और थ्री एफ़डीसी की दवाएं 50-50 हजार गोलियां प्रत्येक सॉल्ट की मिल चुकी हैं। यह दवाएं जनपद के तीन जिला चिकित्सालयों और सीएमओ कार्यालय के स्टोर ने स्थानीय स्तर पर क्रय कर ली गई हैं। इसके अलावा फोर एफ़डीसी की 6000 एवं थ्री एफ़डीसी की 1200 दवाएं भी स्थानीय स्तर पर क्रय की गई हैं। सभी दवाओं को टीबी ड्रग स्टोर, शिवपुर से समस्त 23 यूनिट में पहुंचाया जा रहा है। करीब 10 टीबी यूनिट पर दवाएं पहुँच चुकी हैं। शेष यूनिट पर भी अतिशीघ्र दवाएं पहुंचाई जाएगी। वर्तमान में जनपद में टीबी के 7544 रोगियों का उपचार चल रहा है।डीटीओ डॉ पीयूष राय ने बताया कि डीएसटीबी के रोगियों के उपचार में पहले दो माह चार दवाएं (फोर एफ़डीसी) और अगले चार माह तीन दवाएं (थ्री एफ़डीसी) चलती हैं।




 क्षय रोगी अपना निर्धारित कोर्स पूरा कर जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाते हैं। सिर्फ इस बात का ध्यान रखा जाए कि नियमित दवा खाने का क्रम न छूटे, क्योंकि दवा छूटने से टीबी की बीमारी बढ़ भी सकती है। इस लिहाज से टीबी से बचाव के लिए जागरूकता भी बेहद जरूरी है। जन समुदाय को यह भी जानना जरूरी है कि टीबी एक गंभीर रोग है। लापरवाही करने पर यह जानलेवा हो सकता है। लेकिन यह रोग असाध्य नहीं है, यानि समय से जांच कराकर उपचार कराया जाए तो टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है। टीबी किसी तरह का कलंक भी नहीं है, इसलिए इसे छिपाने की भी जरूरत नहीं है।

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