विधि विभाग,काशी विद्यापीठ में 'रेलीवेंस ऑफ न्यू क्रीमिनल लॉ इन चेंजिंग इण्डिया' विषयक कार्यशाला का आयोजन

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वाराणसी।विधि विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कॉन्फ्रेंस हॉल में रविवार को 'रेलीवेंस ऑफ न्यू क्रीमिनल लॉ इन चेंजिंग इण्डिया' विषयक एक दिसवीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता माननीया न्यायमूर्ति स्वर्णकान्ता शर्मा, दिल्ली उच्च न्यायालय, दिल्ली ने कहा कि देश में जो न्याय प्रक्रिया चल रही है वो अंग्रेजों ने दी है।


हम अंग्रेजों के द्वारा दी गयी परिभाषा को पढ़ते हैं। हम भारतीयों द्वारा दी गयी न्याय व्यवस्था कभी नहीं पढ़ते, जबकि भारतीय न्याय व्यवस्था बहुत मजबूत है। उन्होंने कहा कि हम भारतीय होते हुऐ भारतीयों के लिए न्याय व्यवस्था बना सकते है। अग्रेजों ने हमें शासित करके रखा था, इसलिए उन्होंने दण्ड शब्द का प्रयोग किया, हर जगह में दण्ड शब्द लिखा है न्याय शब्द नहीं लिखा है। कहा कि जस्टिस का मतलब पूर्ण न्याय से होता है। न्याय व्यवस्था को बदलना एक हिम्मत का कार्य है। नये आपराधिक कानून बनाने के सम्बंध में 3200 सुझाव लोगों से लिया गया, इसके उपरान्त भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, भारतीय न्याय संहिता 2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 कानून का रूप ले लिया।



 विशिष्ट अतिथि प्रो. पिंकी शर्मा, विधि सकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय ने कहा कि विधि में हमने पुराने कानून को बनाया है, फिर मध्यकालीन दौर में मुस्लिम विधि को जोड़ा गया फिर अंग्रेज आये और नये कानून बनाये। तीनों नये कानूनों की चर्चा करते हुए सामुदयिक सेवा का प्रावधान छोटे अपराधों के लिए हैं। जेण्डर न्यूट्रल विधि जो बनी है, उसमें जेण्डर इनक्लूसिव लैग्वेज है जो पुरूष एवं महिलाओं पर लागू होगा। इस नये कानून में पुलिस की जवाबदेयी बढ़ा दी गयी है एवं शून्य एफ.आई.आर. को अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में लागू किया गया है। इलेक्ट्रिॉनिक मोड को नये कानून में लाये जाने से अब अधिकारों की रक्षा पूर्ण रूप से सम्भव है। फॉरेंन्सिक साइंस को बढ़ावा दिया जा रहा है।अध्यक्षता करते हुए काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि नये कानून से वंचित वर्ग को बल मिलेगा और विक्टिम सेन्ट्रिक एप्रोच के अन्तर्गत लाया गया है। विधि का अभिप्राय सुधार होना चाहिए।




 विधि को सुधार केन्द्रित एवं न्याय केन्द्रित होना चाहिए न कि दण्ड केन्द्रित होना चाहिए।कार्यशाला के तकनीकी सत्र में प्रो. राकेश कुमार सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष, लखनऊ विश्वविद्यालय, प्रो. पंकज कुमार चतुर्वेदी, संकायाध्यक्ष विधि संकाय, रांची विश्वविद्यालय, रांची, प्रो. योगेन्द्र कुमार वर्मा, संकायाध्यक्ष, पटना विश्वविद्यालय, पटना, डॉ. राजू मांझी स्कूल ऑफ लॉ, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय एवं डॉ. रविकान्त देव, उप निदेशक, अभियोजन प्रकोष्ठ, बिहार सुधारात्मक प्रशासनिक संस्थान, हाजीपुर, वैशाली ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, भरतीय न्याय संहिता 2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 पर केन्द्रित बौद्धिक व्याख्यान प्रस्तुत किया। 



अतिथियों का स्वागत प्रो. रंजन कुमार, विभागाध्यक्ष एवं संकयाध्यक्ष, विधि विभाग ने किया। संचालन आयोजन सचिव डॉ. मेराज हाशमी एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला समन्वयक डॉ. शिल्पी गुप्ता ने किया।

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